बरेली: एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा (EC) मुख्य रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के
बाद महिलाओं में होने वाला कैंसर माना जाता है और कम उम्र की महिलाओं में यह
अपेक्षाकृत कम देखा जाता है। लेकिन आजकल देर से शादी और देर से मां बनने की बढ़ती
प्रवृत्ति के कारण कई प्रीमेनोपॉज़ल और नलिपेरस (जिनकी संतान नहीं है) महिलाओं में
कम उम्र में ही एंडोमेट्रियल कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इस आयु वर्ग में यह
कैंसर आनुवंशिक (Hereditary) या गैर-आनुवंशिक कारणों जैसे मोटापा, पीसीओएस और अन्य हार्मोनल समस्याओं से
जुड़ा हो सकता है।
कम उम्र की महिलाओं में एंडोमेट्रियल
कैंसर का पारंपरिक इलाज सर्जरी के माध्यम से गर्भाशय, दोनों ओवरी और लिम्फ नोड्स को हटाना होता
है। हालांकि, यह उपचार भविष्य
में मां बनने की संभावना को समाप्त कर देता है, जो कैंसर विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे
में बिना इलाज के परिणामों से समझौता किए हार्मोनल थेरेपी के जरिए फर्टिलिटी
प्रिजर्वेशन यानी प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने का विकल्प तेजी से उभरती हुई
रणनीति बन रहा है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के गायने-ऑन्कोसर्जरी (रोबोटिक एवं
लैप्रोस्कोपिक) विभाग की एसोसिएट
डायरेक्टर डॉ. मोनिशा
गुप्ता ने बताया “फर्टिलिटी
प्रिजर्वेशन आधारित हार्मोनल उपचार केवल उन्हीं महिलाओं को दिया जाना चाहिए
जिन्हें स्टेज IA एंडोमेट्रियोइड
प्रकार का एंडोमेट्रियल कैंसर हो और MRI में मांसपेशियों
(मायोमेट्रियम) में कैंसर का फैलाव न दिखे। इस प्रकार के मरीजों में रोग का
प्रोग्नोसिस काफी अच्छा होता है और हार्मोनल उपचार का रिस्पॉन्स भी बेहतर मिलता
है। युवा महिलाओं में एंडोमेट्रियल कैंसर के हार्मोनल प्रबंधन के लिए कई प्रकार की
हार्मोनल दवाओं का उपयोग किया जाता है। इनमें मेड्रोक्सीप्रोजेस्टेरोन एसीटेट और
मेगेस्ट्रोल एसीटेट सबसे अधिक उपयोग में आने वाली दवाएं हैं। हार्मोनल थेरेपी की
आदर्श अवधि अभी तक पूरी तरह तय नहीं है, लेकिन सामान्यतः
इसका उपचार 8 से 12 महीनों तक चलता है। कंजर्वेटिव यानी
हार्मोन आधारित उपचार से लगभग 75 प्रतिशत मरीजों
में अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिलता है। उपचार के लगभग 6 महीने बाद गर्भाशय की दोबारा बायोप्सी
करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि कैंसर पूरी तरह समाप्त हुआ है या नहीं।“
यदि मरीज में पूर्ण रिस्पॉन्स मिल जाता है, तो उसे जल्द से जल्द गर्भधारण की योजना बनाने की सलाह दी जाती है, यहां तक कि पूर्ण रिस्पॉन्स मिलने के पहले महीने से ही। गर्भधारण में देरी से कैंसर दोबारा लौटने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए महिलाओं को असिस्टेड रिप्रोडक्टिव ट्रीटमेंट (ART) के लिए फर्टिलिटी क्लिनिक रेफर किया जाता है ताकि गर्भधारण की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके।
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