गोरखपुर: कुछ समय पहले तक हड्डियों या सॉफ्ट टिश्यू के कैंसर का मतलब अक्सर एक ही होता था—अंग काटना। कैंसर को पूरी तरह हटाने और उसके फैलाव को रोकने के लिए यह सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता था। हालांकि इससे मरीज की जान तो बच जाती थी, लेकिन उसके साथ ही उसकी चलने-फिरने की क्षमता, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पर गहरा असर पड़ता था।
आज ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी और मस्कुलोस्केलेटल सर्जरी में हुए आधुनिक विकास ने इस तस्वीर को काफी बदल दिया है। अब कई मामलों में सर्जन कैंसर वाले ट्यूमर को निकालते हुए पूरे अंग को सुरक्षित रख सकते हैं। इस प्रक्रिया को लिम्ब-स्पेरिंग या लिम्ब-सेल्वेज सर्जरी कहा जाता है, जिसमें ट्यूमर के साथ थोड़ा स्वस्थ टिश्यू हटाया जाता है, लेकिन बाकी अंग को बचा लिया जाता है। इसके बाद प्रभावित हड्डी या जोड़ को प्रोस्थेटिक इम्प्लांट, बोन ग्राफ्ट या दोनों के संयोजन से दोबारा बनाया जाता है। यह तकनीक ऑस्टियोसारकोमा, ईविंग सारकोमा जैसे बोन कैंसर और कुछ सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा में भी कारगर साबित हो रही है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी एवं जॉइंट रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. विवेक वर्मा ने बताया “इस तरह की सर्जरी को सफल बनाने में कई मेडिकल एडवांसमेंट्स ने अहम भूमिका निभाई है। हाई प्रिसिशन इमेजिंग जैसे MRI और CT स्कैन से ट्यूमर की सटीक लोकेशन और आसपास की नसों व ब्लड वेसल्स की पहचान हो जाती है, जिससे सर्जरी अधिक सुरक्षित बनती है। वहीं, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के जरिए सर्जरी से पहले ट्यूमर को छोटा किया जाता है, जिससे उसे निकालना आसान हो जाता है। आधुनिक सर्जिकल टूल्स भी अब इतनी सटीकता के साथ काम करते हैं कि बीमार टिश्यू को हटाते समय स्वस्थ हिस्सों को सुरक्षित रखा जा सकता है। ट्यूमर हटाने के बाद रिकंस्ट्रक्शन का चरण बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिससे न केवल अंग बचता है बल्कि उसकी कार्यक्षमता भी बनी रहती है। इसके लिए प्रोस्थेटिक इम्प्लांट, खासकर बच्चों के लिए एक्सपैंडेबल इम्प्लांट, बोन ग्राफ्ट और सॉफ्ट टिश्यू रिपेयर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी के जरिए मरीज धीरे-धीरे अपनी ताकत, लचीलापन और संतुलन वापस पाता है। कई मरीज इलाज के बाद फिर से स्कूल, कामकाज और यहां तक कि खेलकूद में भी लौट पाते हैं।“
इस तरह की सर्जरी का सबसे ज्यादा फायदा बच्चों को होता है, क्योंकि इससे उनका शारीरिक विकास, मानसिक संतुलन और सामान्य जीवनशैली बनाए रखने में मदद मिलती है। वहीं वयस्कों के लिए भी यह तकनीक बेहद लाभकारी है, क्योंकि इससे उनकी स्वतंत्रता और गतिशीलता बनी रहती है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए जरूरी है।
हालांकि, कुछ मामलों में जहां कैंसर प्रमुख नसों, ब्लड वेसल्स या बड़े हिस्से में फैल चुका होता है, वहां अंग काटना अब भी सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी आधुनिक प्रोस्थेटिक्स और रिहैबिलिटेशन मरीजों को सक्रिय और संतोषजनक जीवन जीने में मदद करते हैं।
कुल मिलाकर, कैंसर उपचार में अंग काटने से अंग बचाने की दिशा में हुआ यह बदलाव उम्मीद की एक नई किरण है। अब केवल जीवन बचाना ही नहीं, बल्कि मरीज की गतिशीलता और गरिमा को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक सर्जरी के चलते आज कई मरीज अस्पताल से न सिर्फ स्वस्थ होकर, बल्कि अपने अंगों के साथ आत्मविश्वास के साथ वापस लौट रहे हैं—और यही इस प्रगति की सबसे बड़ी जीत है।

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