हल्द्वानी: एडवांस्ड स्पाइन केयर और समय पर मेडिकल इंटरवेंशन का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, के डॉक्टरों ने 29-वर्षीय मरीज, श्री गुरवीर सिंह संधू का सफलतापूर्वक इलाज किया। मरीज पिछले दो वर्षों से गंभीर पीठ दर्द और पिछले दो महीनों से तीव्र सायटिका से जूझ रहे थे। उनका इलाज एक मिनिमली इनवेसिव माइक्रोस्कोपिक स्पाइन प्रोसीजर के जरिए किया गया। यह मामला युवा वर्ग में बढ़ते स्पाइन डिसऑर्डर्स की ओर भी इशारा करता है, जो अक्सर सेडेंटरी लाइफस्टाइल, गलत पोश्चर और फिजिकल स्ट्रेन से जुड़े होते हैं।
हल्द्वानी निवासी, श्री संधू, जो सामान्य रूप से सक्रिय जीवनशैली जीते थे, तेज लोअर बैक पेन के साथ अस्पताल पहुंचे, जो उनके बाएं पैर तक फैल रहा था। समय के साथ उनकी स्थिति बिगड़ती गई, जिससे उनके पैर में कमजोरी और चलने में गंभीर परेशानी होने लगी। उन्होंने दवाइयों, आराम और फिजियोथेरेपी सहित कई उपाय आजमाए, लेकिन कोई स्थायी राहत नहीं मिली। बेहतर इलाज की तलाश में वे मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज पहुंचे, जहां इमेजिंग टेस्ट और एमआरआई स्कैन में लंबर स्पाइन के L4–L5 लेवल पर गंभीर कंप्रेशन पाया गया। यदि समय रहते इलाज नहीं होता, तो यह स्थिति लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल कॉम्प्लीकेशन्स का कारण बन सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की सलाह दी।
इस मामले पर बात करते हुए, मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर - डॉ. आशीष गुप्ता, ने कहा, “यह केस इस बात का संकेत है कि अब कम उम्र के मरीजों में भी गंभीर स्पाइन समस्याएं सामने आ रही हैं, जो पहले आमतौर पर अधिक उम्र में देखी जाती थीं। श्री संधू के मामले में L4–L5 लेवल पर गंभीर कंप्रेशन था, जिसके लिए तत्काल सर्जिकल मैनेजमेंट जरूरी था। हमने एक मिनिमली इनवेसिव माइक्रोस्कोपिक स्पाइन प्रोसीजर किया, जिससे प्रभावित नर्व रूट्स पर सटीक तरीके से प्रेशर कम किया गया और आसपास के टिशू सुरक्षित रहे। इस तरह की तकनीक से मरीज को कम दर्द, तेजी से रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक रहने का लाभ मिलता है।”
प्रोसीजर के बाद मरीज की रिकवरी बेहद तेज रही। उन्हें अगले ही दिन दर्द में काफी राहत महसूस हुई और वे बिना किसी सहारे के आराम से चलने लगे। श्री संधू को 24 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वे पूरी तरह से मोबाइल हो गए। कुछ ही समय में उन्होंने अपनी सामान्य दिनचर्या फिर से शुरू कर दी, जो इस तरह की मिनिमली इनवेसिव स्पाइन तकनीकों की प्रभावशीलता और तेज रिहैबिलिटेशन को दर्शाता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, के न्यूरोसर्जरी एवं स्पाइन सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट - डॉ. अरविंदर दयाल, ने कहा, “यह केस युवाओं के लिए एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर्स की बढ़ती अहमियत को भी दर्शाता है। पारंपरिक ओपन सर्जरी के मुकाबले इन तकनीकों में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, मसल्स को कम नुकसान होता है और रिकवरी तेज होती है। युवा और एक्टिव मरीजों के लिए इसका मतलब है कम डाउनटाइम, जल्दी काम पर वापसी और लाइफस्टाइल में न्यूनतम बाधा। समय पर डायग्नोसिस और सर्जिकल इंटरवेंशन से लंबे समय की विकलांगता को रोका जा सकता है और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं।”
डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि स्पाइन हेल्थ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर युवाओं में, जो अक्सर लगातार पीठ दर्द या पैरों में असहजता जैसे शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेते हैं।
एडवांस टेक्नोलॉजी और एक्सपर्ट क्लिनिकल केयर के साथ, मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज कॉम्प्लेक्स स्पाइन समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के इलाज में बेहतर परिणाम और जीवन की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित कर रहा है।

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