जब हर मिलीमीटर महत्वपूर्ण था, यथार्थ हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कर दिखाया चमत्कार
फरीदाबाद : यथार्थ
सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के बहु-विषयक डॉक्टरों की टीम ने एक अत्यंत जटिल
मामले का सफलतापूर्वक उपचार कर 34 सप्ताह में जन्मे समयपूर्व नवजात
शिशु को नया जीवन प्रदान किया। शिशु को पोस्टेरियर यूरेथ्रल वाल्व (PUV) नामक एक दुर्लभ लेकिन गंभीर जन्मजात अवरोध का निदान हुआ था, जो समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।
जन्म के तुरंत बाद शिशु को गंभीर तकलीफ के लक्षण दिखाई दिए क्योंकि वह मूत्र
त्याग नहीं कर पा रहा था, जिससे मूत्र रुकावट (यूरिनरी
रिटेंशन) की आपात स्थिति उत्पन्न हो गई। नवजात की स्थिति को स्थिर करने के लिए
तुरंत कैथेटर डाला गया। अगले कुछ दिनों तक नवजात विशेषज्ञों (नियोनेटोलॉजिस्ट), मूत्ररोग विशेषज्ञों (यूरोलॉजिस्ट) और एनेस्थीसिया
विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर शिशु की नाजुक स्थिति, कम जन्म वजन और समयपूर्व जन्म से जुड़ी जटिलताओं को संतुलित करते हुए सर्जरी
की तैयारी की।
डॉ. धनसुख कुमावत, निदेशक – पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद
ने बताया,
“शिशु का जन्म 34 सप्ताह में गंभीर श्वसन कष्ट और
पेट में सूजन के साथ हुआ था। उसे तुरंत उन्नत देखभाल के लिए एनआईसीयू में भर्ती
किया गया। जांच में पोस्टेरियर यूरेथ्रल वाल्व दोष का पता चला, जिससे मूत्रमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था और दोनों
किडनियों को गंभीर नुकसान पहुंचा था। इसके कारण शरीर में अत्यधिक अम्लता, बार-बार पोटैशियम का बढ़ा स्तर और गंभीर रक्त संक्रमण जैसी
जानलेवा जटिलताएं उत्पन्न हो गई थीं। सावधानीपूर्वक स्थिरीकरण के बाद, हमने जीवन के 10वें दिन 2.2 किलोग्राम वजन वाले इस शिशु पर सफलतापूर्वक पीयूवी रिपेयर
सर्जरी की। सर्जरी के बाद शिशु ने सामान्य रूप से मूत्र त्याग करना शुरू किया और
तेजी से स्वस्थ होकर प्रक्रिया के तीसरे दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। यह हमारे
अस्पताल में समयपूर्व एवं कम वजन वाले शिशु पर की गई एक दुर्लभ और सफल लेज़र
सर्जरी है।”
जटिलताओं के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही। नवजात को तुरंत राहत मिली
और उसने स्वयं मूत्र त्याग करना शुरू किया, जो उसके स्वस्थ होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। सर्जरी के बाद
शिशु की लगातार निगरानी की जा रही है और उसकी स्थिति में निरंतर सुधार देखा जा रहा
है।
डॉ. आलोक झा, वरिष्ठ सलाहकार – यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद
ने कहा, इतने छोटे और समयपूर्व शिशुओं में
ऑपरेशन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। पूरी प्रक्रिया मिलीमीटर स्तर की सटीकता
और सही समय पर निर्भर करती है। हमने सर्जरी के लिए अत्यंत सूक्ष्म 4.5 फ्रेंच स्कोप और 0.2 मिमी थुलियम फाइबर लेज़र का उपयोग किया। ऐसे मामलों में
सफलता और जोखिम के बीच बहुत पतली रेखा होती है। हमें खुशी है कि शिशु ने सकारात्मक
प्रतिक्रिया दी और सुरक्षित रूप से स्वस्थ हो रहा है। इस सफल उपचार ने न केवल
बच्चे की जान बचाई, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर
जटिलताओं जैसे किडनी क्षति, बार-बार संक्रमण और मूत्राशय की
दीर्घकालिक समस्याओं को भी रोका, जो अनुपचारित पीयूवी में सामान्यतः
देखी जाती हैं।”
अस्पताल की त्वरित पहचान, सक्रिय दृष्टिकोण और सटीक न्यूनतम
इनवेसिव हस्तक्षेप ने इस सकारात्मक परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह मामला यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद की उन्नत क्षमताओं को
दर्शाता है, जो दुर्लभ और उच्च-जोखिम नवजात
स्थितियों के प्रबंधन में अग्रणी है। अत्याधुनिक तकनीक, विशेष बाल मूत्ररोग सेवाओं और समर्पित एनआईसीयू टीम के साथ अस्पताल नवजात
देखभाल और जटिल बाल शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद विश्वस्तरीय बाल एवं नवजात चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और दुर्लभ एवं गंभीर चिकित्सा चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों को नई आशा देता है।

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