अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की संभावनाएं और परिणाम

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध: संभावनाएं और परिणाम
Image Courtesy: BBC 

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फरवरी 2026 में चरम पर है, जहां राष्ट्रपति ट्रंप परमाणु वार्ताओं में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की बात कह रहे हैं, जबकि ईरान कड़े रुख पर अड़ा है। अप्रत्यक्ष वार्ताएं ओमान और जेनेवा में चल रही हैं, लेकिन सैन्य जमावड़े और धमकियां युद्ध की आशंका बढ़ा रही हैं। 


वर्तमान तनाव का पृष्ठभूमि

ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की क्रूर कार्रवाई के बाद ट्रंप ने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई को हटाने की बात कही है। अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और अन्य सैन्य संसाधन मध्य पूर्व में तैनात किए हैं, जबकि ईरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखने पर जोर दे रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि डील न होने पर "बहुत दर्दनाक" परिणाम होंगे। 


युद्ध की संभावनाएं

पूर्वानुमान बाजारों के अनुसार, जून 2026 से पहले अमेरिकी हमले की संभावना 71% है, मुख्यतः परमाणु कार्यक्रम और आंतरिक दमन के कारण। हालांकि, अप्रत्यक्ष वार्ताएं चल रही हैं, जो ईरान को सैंक्शंस राहत के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिससे युद्ध की तत्काल संभावना कम लगती है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने वार्ता को "एक कदम आगे" बताया, लेकिन खामेनेई विदेशी हस्तक्षेप को अस्वीकार कर रहे हैं। कुल मिलाकर, कूटनीति अभी प्रबल है, लेकिन गलतफहमी से युद्ध भड़क सकता है। 

यदि युद्ध हुआ तो परिणाम

युद्ध होने पर अमेरिकी सैन्य अभियान हफ्तों लंबा हो सकता है, जिसमें ईरान के परमाणु केंद्र, सुरक्षा ढांचे और तेल निर्यात पर हमले शामिल होंगे। ईरान असममित युद्ध से जवाब देगा, जैसे ड्रोन, मिसाइलें और तोरपीडो बोट्स से अमेरिकी जहाजों पर हमला। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ सकती हैं, जिससे मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी। 


क्षेत्रीय प्रभाव गंभीर होंगे। ईरान सहयोगी गुटों (हिजबुल्लाह, हूती) से इजरायल, सऊदी पर हमला करवा सकता है, जिससे व्यापक युद्ध फैलेगा। शरणार्थी संकट, पूंजी पलायन और यूरोप में प्रवास बढ़ेगा। अमेरिकी सेनाओं को ईरान के विशाल मिसाइल भंडार से भारी खतरा होगा। 


आर्थिक और वैश्विक प्रभाव

तेल आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगाएगी। भारत जैसे आयातक देशों पर असर पड़ेगा, जहां तेल मूल्यवृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ेगी। सैंक्शंस से ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही तबाह है, युद्ध से जनविद्रोह बढ़ सकता है। अमेरिका के लिए साइबर हमले और लंबे संघर्ष का जोखिम है। 


भारत पर संभावित असर

भारत को ईरान से तेल आयात पर निर्भरता है, युद्ध से ईंधन महंगा हो जाएगा। खाड़ी में भारतीय प्रवासी श्रमिक खतरे में पड़ेंगे, और व्यापार बाधित होगा। भारत तटस्थ रहेगा, लेकिन डिप्लोमेसी से शांति प्रयास कर सकता है। 


निष्कर्ष और भविष्य दृष्टि

युद्ध की संभावना मध्यम है, लेकिन कूटनीति से टाला जा सकता है। ट्रंप की आक्रामकता और ईरान की जिद टकराव बढ़ा रही है, लेकिन वार्ता से राहत संभव है। वैश्विक स्थिरता के लिए शांति आवश्यक है।

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