आधुनिक तकनीक से अब ब्रेन ट्यूमर का इलाज ज्यादा सुरक्षित

आधुनिक तकनीक से अब ब्रेन ट्यूमर का इलाज ज्यादा सुरक्षित

गुवाहाटी: ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क या खोपड़ी के भीतर सेल्स की असामान्य वृद्धि को कहा जाता हैजो सेल्स के अनियंत्रित विभाजन के कारण होती है। ये ट्यूमर सीधे मस्तिष्क में उत्पन्न हो सकते हैंजिन्हें प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर कहा जाता हैया फिर शरीर के किसी अन्य हिस्से में मौजूद कैंसर से फैलकर मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैंजिन्हें सेकेंडरी या मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। ट्यूमर की प्रकृति और उसकी स्थिति के अनुसार यह ब्रेन टिशूसब्लड वेसल्सक्रेनियल नर्व्समेनिंजीजखोपड़ीपिट्यूटरी ग्लैंड या पीनियल ग्लैंड को प्रभावित कर सकता हैजिससे कई तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा हो सकती हैं। 


ब्रेन ट्यूमर के इलाज में समय पर पहचान और सही उपचार बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर जांच की शुरुआत विस्तृत न्यूरोलॉजिकल परीक्षण से होती हैजिसके बाद एमआरआई या सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग जांच की जाती है। कुछ विशेष मामलों में सर्जरी से पहले ब्रेन एंजियोग्राफी की जाती हैजिससे ट्यूमर में रक्त आपूर्ति का आकलन किया जा सके और आवश्यकता होने पर सर्जरी से पहले उसकी रक्त आपूर्ति को कम किया जा सके। इलाज की योजना हर मरीज के लिए अलग-अलग तैयार की जाती हैजिसमें उम्रसामान्य स्वास्थ्यट्यूमर का प्रकारआकारस्थान और उसकी बायोलॉजिकल प्रकृति को ध्यान में रखा जाता है। उपचार में सर्जरीरेडिएशन थेरेपीकीमोथेरेपी या टारगेटेड दवाओं में से एक या एक से अधिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 


मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलसाकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड ऑफ यूनिट डॉ. कपिल जैन ने बताया “ब्रेन ट्यूमर को मुख्य रूप से बेनाइन और मैलिग्नेंट दो श्रेणियों में बांटा जाता है। बेनाइन ट्यूमर कैंसरयुक्त नहीं होतेलेकिन यदि वे मस्तिष्क की महत्वपूर्ण संरचनाओं जैसे बड़ी ब्लड वेसल्स , क्रेनियल नर्व्स या ब्रेनस्टेम के पास होंतो गंभीर खतरा बन सकते हैं। वहीं मैलिग्नेंट ट्यूमर कैंसरयुक्त होते हैंजो या तो सीधे मस्तिष्क में विकसित होते हैं या फेफड़ेस्तनकिडनीकोलन या त्वचा जैसे अंगों के कैंसर से फैलकर मस्तिष्क तक पहुंचते हैं। कुछ मामलों में ब्रेन मेटास्टेसिस के लक्षण तब दिखाई देते हैंजब मूल कैंसर का पता भी नहीं चला होता। अधिकतर प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर के सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैंलेकिन कुछ जोखिम कारक पहचाने गए हैं। आयोनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आनाजैसे पहले की गई रेडियोथेरेपी या बार-बार हाई डोज इमेजिंग जांचब्रेन ट्यूमर के खतरे को बढ़ा सकती है। कुछ आनुवंशिक बीमारियों में भी ब्रेन ट्यूमर की संभावना अधिक होती है। इसके अलावाकमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगजैसे एचआईवी या एड्स से पीड़ित मरीजकुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।“ 


ब्रेन ट्यूमर के लक्षण ट्यूमर के आकारप्रकार और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ ट्यूमर लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकते हैं। आम लक्षणों में लगातार या बार-बार होने वाला सिरदर्दजो अक्सर उल्टी के साथ होता हैदौरे पड़नानजर से जुड़ी समस्याएं जैसे धुंधला या दोहरा दिखनासुनने में कमीचक्कर आनाशरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवाहाथ-पैरों में सुन्नपनयाददाश्त कमजोर होनाव्यक्तित्व या व्यवहार में बदलावसंतुलन और तालमेल में परेशानीचेहरे में दर्द या असामान्य गतिविधियां शामिल हैं। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत किसी विशेष न्यूरो सेंटर में जांच कराना जरूरी है। 


डॉ. कपिल ने आगे बताया “मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज में ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सर्जरी के दौरान यदि ट्यूमर मस्तिष्क के बेहद संवेदनशील हिस्सों के पास होतो न्यूरोलॉजिकल नुकसान के खतरे को कम करने के लिए आंशिक सर्जरी की जाती हैजबकि सुरक्षित स्थिति में पूरा ट्यूमर निकालने का प्रयास किया जाता है। कुछ खास स्कल बेस ट्यूमर जैसे पिट्यूटरी एडेनोमा और क्लाइवल कॉर्डोमा में एंडोस्कोपिक सर्जरी का उपयोग किया जाता है। गहराई में स्थित या एक से अधिक ट्यूमर के मामलों में स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी के जरिए अत्यंत सटीक तरीके से डायग्नोसिस किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी में फोकस्ड आयोनाइजिंग रेडिएशन का इस्तेमाल कर कैंसर सेल्स को नष्ट किया जाता हैजबकि आसपास के स्वस्थ टिश्यू को सुरक्षित रखा जाता है। कीमोथेरेपी में ऐसी दवाओं का प्रयोग किया जाता हैजो विशेष रूप से कैंसर सेल्स को निशाना बनाती हैं। कुछ धीमी गति से बढ़ने वाले बेनाइन ट्यूमर में नियमित जांच के साथ ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति भी अपनाई जाती है।“  


हालांकि सभी ब्रेन ट्यूमर को पूरी तरह रोका नहीं जा सकताफिर भी कुछ उपाय जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। अनावश्यक आयोनाइजिंग रेडिएशन से बचनाकार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन करनापरिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास होने पर जेनेटिक काउंसलिंग कराना और एचआईवी या एड्स जैसी स्थितियों का सही प्रबंधन कर इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना इसमें शामिल हैं। ब्रेन ट्यूमर के बेहतर इलाज और अच्छे परिणाम के लिए जागरूकतासमय पर पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा तक पहुंच सबसे अहम कारक हैं। 

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