रोहतक - सीटी स्कैन या छाती के एक्स-रे में फेफड़ों में गांठ या छोटा सा धब्बा दिखाई देना चिंता की वजह बन सकता है। कई लोगों को लगता है कि लंग नोड्यूल का मतलब फेफड़ों का कैंसर है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। ज्यादातर लंग नोड्यूल कैंसर वाले नहीं होते। ये पुराने संक्रमण, सूजन, फेफड़ों में बने निशान या अन्य सामान्य कारणों से भी हो सकते हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. अनादी पचौरी ने बताया, “फेफड़ों में नोड्यूल दिखने का मतलब सीधे तौर पर कैंसर नहीं होता। डॉक्टर इसके आकार, बनावट, किनारों, समय के साथ होने वाले बदलाव और मरीज के जोखिम कारकों को देखकर आगे की जांच तय करते हैं।”
नोड्यूल की साइज और बनावट महत्वपूर्ण होती है। बड़ी गांठों में कैंसर की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। चिकने और साफ किनारों वाली गांठें अक्सर सामान्य होती हैं, जबकि अनियमित या कांटेदार किनारों वाली गांठों की ज्यादा जांच की जरूरत पड़ सकती है। अगर फॉलो-अप स्कैन में नोड्यूल का आकार बढ़ रहा है, तो यह भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
डॉ. अनादी ने आगे बताया "धूम्रपान करने या पहले कर चुके लोगों, बढ़ती उम्र, लंबे समय तक धुएं या एस्बेस्टस जैसे पदार्थों के संपर्क और परिवार में फेफड़ों के कैंसर के इतिहास वाले लोगों में जोखिम अधिक हो सकता है। हालांकि, बिना धूम्रपान करने वालों में भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।"
जांच के लिए पुराने स्कैन से तुलना, नियमित सीटी स्कैन, कुछ मामलों में PET-CT और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी की जाती है। लगातार खांसी, खांसी में खून, सीने में दर्द, सांस फूलना, बिना वजह वजन कम होना या बार-बार संक्रमण जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
फेफड़ों में नोड्यूल मिलने पर घबराने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह और समय पर फॉलो-अप जरूरी है। सही जांच से कैंसर वाले और सामान्य नोड्यूल में अंतर किया जा सकता है।


Social Plugin