मेदांता नोएडा ने ‘मायलोमा अवेयरनेस रन’ का किया आयोजन, समय पर जांच और इलाज का दिया संदेश

मेदांता नोएडा ने ‘मायलोमा अवेयरनेस रन’ का किया आयोजन, समय पर जांच और इलाज का दिया संदेश

•  रन में सभी आयु वर्ग के 1500 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा


नोएडा: मायलोमा अवेयरनेस मंथ के अवसर पर मेदांता हॉस्पिटल नोएडा ने पिकू स्पोर्ट्स के साथ मिलकर ‘मेदांता नोएडा अवेयरनेस रन – मार्च फॉर मायलोमा’ का सफल आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य मल्टीपल मायलोमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और यह संदेश देना था कि समय पर पहचान और एडवांस इलाज से इस बीमारी का सफल उपचार संभव है।


इस रन में 1500 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, हॉस्पिटल स्टाफ, मैनेजमेंट, मरीज, कैंसर सर्वाइवर्स और स्थानीय निवासी शामिल थे। कार्यक्रम में 10 किमी, 5 किमी और 3 किमी की दौड़ के साथ-साथ कैंसर सर्वाइवर्स के लिए विशेष 1 किमी वॉक भी आयोजित की गई, जिसने उनके जज्बे को सलाम करते हुए अन्य लोगों को प्रेरित किया।


सुबह 6:00 बजे हॉस्पिटल परिसर से शुरू हुई इस रन का आयोजन प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया। प्रतिभागियों को हाई-क्वालिटी टी-शर्ट, रास्ते में हाइड्रेशन सपोर्ट, एनर्जी ड्रिंक्स, फिनिशर मेडल, सर्टिफिकेट और रन के बाद रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराए गए। पूरे रूट पर मेडिकल टीम्स तैनात रहीं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा, कार्यक्रम में इंटरैक्टिव सेशंस और एंगेजिंग एक्टिविटीज भी शामिल रहीं, जिससे यह इवेंट जानकारीपूर्ण और मनोरंजक दोनों बना।


इस अवसर पर ओवरऑल कैटेगरी में शीर्ष तीन पुरुष और महिला विजेताओं को सम्मानित किया गया। साथ ही अंडर 18, 18 से 45, 45 से 60 और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में भी विजेताओं को पुरस्कार देकर सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रोत्साहित किया गया।


मायलोमा के प्रति जागरूकता और इलाज में हो रही प्रगति पर जोर देते हुए, मेदांता हॉस्पिटल नोएडा के हीमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग की डायरेक्टर डॉ. ईशा कौल ने कहा, “मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो बोन मैरो में मौजूद प्लाज्मा सेल्स को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में लगातार हड्डियों में दर्द, थकान, बार-बार संक्रमण, बिना कारण वजन कम होना और किडनी से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। दुर्भाग्यवश, इन लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे डायग्नोसिस में देरी होती है। लेकिन बढ़ती जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग से इसे शुरुआती चरण में पहचाना जा सकता है। खास बात यह है कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT), टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों ने मरीजों के इलाज के परिणामों में काफी सुधार किया है। आज मायलोमा न केवल मैनेजेबल है, बल्कि कई मामलों में इसका प्रभावी इलाज संभव है, जिससे मरीज बेहतर और लंबा जीवन जी सकते हैं।”


डॉ. ईशा कौल ने आगे कहा, “मायलोमा अवेयरनेस रन हमारे ब्लड कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने और समय पर जांच के महत्व को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है। ऐसे कम्युनिटी-ड्रिवन इनिशिएटिव्स के जरिए हम लोगों को लक्षणों, रिस्क फैक्टर्स और समय पर मेडिकल अटेंशन के महत्व के बारे में जागरूक करना चाहते हैं। आज जिस तरह से लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वह स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह देखना उत्साहजनक है कि समाज के हर वर्ग के लोग एक सार्थक उद्देश्य के लिए एकजुट हुए और मायलोमा से जूझ रहे मरीजों का समर्थन किया।”


‘मेदांता नोएडा अवेयरनेस रन’ इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जागरूकता, समय पर पहचान और एडवांस इलाज तक पहुंच, मायलोमा जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ लड़ाई में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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