भिवानी: ब्लड हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह शरीर के अलग-अलग अंगों तक ऑक्सीजन, पोषक तत्व और हार्मोन पहुंचाता है। इसके बावजूद, कई महिलाएं जीवन के विभिन्न चरणों में ब्लड से जुड़ी समस्याओं का सामना करती हैं, लेकिन अक्सर शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पातीं। ये समस्याएं शरीर की ऊर्जा, इम्युनिटी और ओवरऑल हेल्थ पर सीधा असर डाल सकती हैं।
महिलाओं में सबसे आम ब्लड डिसऑर्डर आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया है। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और पोषण की कमी के कारण महिलाओं में एनीमिया होने का खतरा ज्यादा होता है। जब शरीर में पर्याप्त आयरन नहीं होता, तो हेल्दी रेड ब्लड सेल्स नहीं बन पातीं, जिससे अत्यधिक थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, चक्कर आना और सांस फूलना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह समस्या रोजमर्रा की जिंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के हीमैटो-ऑन्को एंड बीएमटी विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ अमृता रामास्वामी ने बताया “इसके अलावा, विटामिन डेफिशिएंसी एनीमिया भी महिलाओं में देखा जाता है, जो विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी के कारण होता है। ये पोषक तत्व ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए जरूरी होते हैं। खराब डाइट, पाचन से जुड़ी समस्याएं या कुछ मेडिकल कंडीशन्स इसकी वजह बन सकती हैं। कुछ महिलाओं में ब्लड क्लॉटिंग से जुड़ी समस्याएं भी होती हैं, जहां ब्लड बहुत जल्दी जम जाता है या सही तरीके से जम नहीं पाता। थ्रोम्बोसिस जैसी स्थिति में नसों में खतरनाक ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है, वहीं ब्लीडिंग डिसऑर्डर के कारण पीरियड्स के दौरान ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग हो सकती है। प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज या कुछ मेडिकल ट्रीटमेंट्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी ब्लड हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर प्रेग्नेंसी में शरीर को मां और बच्चे दोनों के लिए अतिरिक्त आयरन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। सही पोषण और मेडिकल केयर न मिलने पर ब्लड से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।“
अच्छी बात यह है कि ज्यादातर ब्लड से जुड़ी बीमारियों को समय रहते पहचाना और मैनेज किया जा सकता है। आयरन से भरपूर आहार, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, प्रोटीन और होल ग्रेन्स का सेवन ब्लड को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही नियमित हेल्थ चेकअप, ब्लड टेस्ट और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना भी बेहद जरूरी है।
महिलाओं को लगातार थकान, असामान्य ब्लीडिंग, बार-बार इंफेक्शन या बिना कारण कमजोरी जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर हीमैटोलॉजिस्ट या मेडिकल स्पेशलिस्ट से सलाह लेकर इन समस्याओं का सही इलाज किया जा सकता है।
ब्लड हेल्थ का ध्यान रखना महिलाओं के लिए मजबूत इम्युनिटी, बेहतर ऊर्जा और ओवरऑल वेलनेस की दिशा में एक जरूरी कदम है।
Social Plugin