चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश में 5-7 लोगों की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद; ओडिशा में भी भारी नुकसान


चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश में 5-7 लोगों की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद; ओडिशा में भी भारी नुकसान
विजयवाड़ा/भुवनेश्वर, 29 अक्टूबर 2026: बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने बुधवार (28 अक्टूबर) की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराकर तटीय जिलों में भारी तबाही मचा दी। नरसापुर के पास (यानम के दक्षिण-पश्चिम में) लगभग 2 से 8 बजे के बीच लैंडफॉल करने वाले इस तूफान की हवाओं की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि कुछ जगहों पर झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचे। इससे आंध्र प्रदेश में कम से कम 5 से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि ओडिशा में भी भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और फसलों को भारी नुकसान हुआ।


आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा असर

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के अनुसार, तूफान से जुड़े हादसों में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 7 तक पहुंच गई है। ज्यादातर मौतें बिजली के करंट लगने, गिरते बिजली के खंभों और पेड़ों से हुईं। विशाखापत्तनम, अनकापल्ली, भीमवरम (पश्चिम गोदावरी) और कोनासीमा में ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं। एक जगह दीवार गिरने और दूसरी जगह ताड़ के पेड़ गिरने से भी जानें गईं।

तटीय जिलों—काकीनाडा, डॉ. बीआर अंबेडकर कोनासीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, एलुरु, कृष्णा, एनटीआर, गुंटूर, बपटला, अनकापल्ली, विशाखापत्तनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम—में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लगभग 15,000 बिजली के खंभे गिर गए, हजारों पेड़ उखड़ गए (सिर्फ कोनासीमा और पश्चिम गोदावरी में करीब 50,000 पेड़, जिनमें नारियल के पेड़ प्रमुख), सड़कें अवरुद्ध हो गईं और कम इलाकों में बाढ़ आ गई। 2.2 से 3.25 लाख हेक्टेयर कृषि और बागवानी फसलें (धान, नारियल, केला आदि) क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे 3 लाख से ज्यादा किसान प्रभावित हुए।

आंध्र प्रदेश में लगभग 57,000 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। 30,000 सरकारी कर्मचारी राहत कार्यों में लगे हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात की और केंद्रीय सहायता मांगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक नुकसान का आकलन केंद्र को भेजा जाएगा और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।


ओडिशा में बचाव अभियान तेज

ओडिशा के दक्षिणी जिलों—गजपति, गंजाम, कोरापुट, मलकानगिरी, रायगड़ा आदि—में भारी बारिश और तेज हवाओं का असर रहा। गजपति सबसे ज्यादा प्रभावित जिला रहा। राज्य सरकार ने 30,000 से 43,000 से अधिक लोगों को 634 राहत केंद्रों में शिफ्ट किया। कई गांव जलमग्न हो गए और कुछ जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं। ओडिशा सरकार ने गंजाम के 300 गांवों से लोगों को एयरलिफ्ट करने की योजना बनाई है। स्कूल बंद रखे गए और ट्रेनें रद्द की गईं।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें दोनों राज्यों में सक्रिय रहीं। भारतीय वायुसेना ने भी मदद के लिए टीमें पहुंचाईं।


मौसम विभाग की चेतावनी और आगे का असर

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अर्नब लैंडफॉल के बाद कमजोर होकर गहरे दबाव क्षेत्र में बदल गया है। लेकिन इसके अवशेषों से छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और यहां तक कि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है। कई जगहों पर 200 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। रेलवे ने दर्जनों ट्रेनें रद्द या स्थगित कीं। हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर चेतावनी और बड़े पैमाने पर निकासी के कारण जान-माल का नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा। फिर भी कृषि क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है, जो किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

सरकारें राहत-पुनर्वास पर फोकस कर रही हैं। बिजली बहाली, सड़कें साफ करने और फसल नुकसान का आकलन तेजी से चल रहा है। लोग सुरक्षित रहें और अधिकारीयों के निर्देशों का पालन करें।


(यह समाचार विभिन्न आधिकारिक स्रोतों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। आंकड़े अपडेट हो सकते हैं।)

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