गले के कैंसर में रोबोटिक सर्जरी: किन मरीजों को मिल सकता है TORS का फायदा?

गले के कैंसर में रोबोटिक सर्जरी: किन मरीजों को मिल सकता है TORS का फायदा?


ग्वालियर - गले और सिर के कैंसर के इलाज में अब ऐसी आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनसे कैंसर को हटाने के साथ-साथ मरीज की बोलने और निगलने की क्षमता को भी बचाने की कोशिश की जाती है। ऐसी ही एक आधुनिक तकनीक है ट्रांसोरल रोबोटिक सर्जरी (TORS)। इसमें मुंह के रास्ते रोबोटिक उपकरणों की मदद से गले के अंदर मौजूद ट्यूमर को हटाया जाता है। इससे बाहर से बड़ा चीरा लगाने की जरूरत कम हो सकती है और स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है।


बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के  सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं यूनिट हेड  , डॉ. सौरभ गुप्ता ने बताया, "TORS में रोबोटिक उपकरण और 3D कैमरे की मदद से गले के अंदर ट्यूमर को साफ तरीके से देखा और हटाया जाता है। इससे मरीज की आवाज और निगलने की क्षमता को बचाने में मदद मिल सकती है।"


TORS का फायदा खासतौर पर शुरुआती या सीमित ओरॉफैरिंजियल कैंसर, जैसे टॉन्सिल और जीभ के आधार के कैंसर वाले चुनिंदा मरीजों को मिल सकता है। HPV से जुड़े कुछ गले के कैंसर में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा, कुछ चुनिंदा सुप्राग्लॉटिक लैरिंजियल कैंसर में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।


डॉ. गुप्ता ने आगे बताया ,यदि गर्दन की लिम्फ नोड में कैंसर मिले, लेकिन कैंसर की मुख्य जगह का पता न चले, तो TORS की मदद से टॉन्सिल और जीभ के आधार की जांच कर छिपे हुए ट्यूमर का पता लगाने में मदद मिल सकती है। कुछ मरीजों में पहले रेडिएशन के बाद कैंसर दोबारा होने पर भी यह सर्जरी विकल्प हो सकती है।


 हर मरीज TORS के लिए उपयुक्त नहीं होता। ट्यूमर की जगह, आकार, फैलाव और मरीज की स्थिति देखकर विशेषज्ञों की टीम फैसला करती है। सही मरीज में यह तकनीक कम दर्द, कम खून बहने और जल्दी रिकवरी के साथ इलाज में मदद कर सकती है।

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