
वाराणसी: एओर्टिक एन्यूरिज्म एक गंभीर हृदय संबंधी स्थिति है, जिसमें शरीर की मुख्य रक्त वाहिका एओर्टा का एक हिस्सा कमजोर होकर फूलने लगता है। यह समस्या लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में बेंटल प्रोसीजर मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के चेयरमैन एवं प्रमुख डॉ. रामजी मेहरोत्रा ने बताया कि एओर्टा का शुरुआती हिस्सा, जिसे एओर्टिक रूट कहा जाता है, बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब यह हिस्सा कमजोर होकर फूलने लगता है, तो एओर्टिक वाल्व में लीकेज या धमनी की अंदरूनी परत फटने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे एन्यूरिज्म पर निगरानी रखी जा सकती है, लेकिन जब एओर्टा का आकार तेजी से बढ़ने लगे, तब सर्जरी जरूरी हो जाती है। बेंटल प्रोसीजर में खराब एओर्टा और एओर्टिक वाल्व को हटाकर उनकी जगह कृत्रिम ग्राफ्ट और आर्टिफिशियल वाल्व लगाए जाते हैं।
डॉ. मेहरोत्रा के अनुसार, आधुनिक तकनीकों और एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद से यह सर्जरी अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो गई है। सही समय पर किया गया इलाज मरीज को सामान्य और बेहतर जीवन जीने का मौका देता है।
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