आगरा: मोटापा आज के समय की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में तेजी से शामिल होता जा रहा है। अधिक वजन केवल बाहरी रूप-रंग से जुड़ी चिंता नहीं है, बल्कि यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, स्लीप एपनिया और जोड़ों से जुड़ी कई समस्याओं का खतरा भी काफी बढ़ा देता है। कई लोग डाइट और एक्सरसाइज के जरिए वजन कम करने की कोशिश करते हैं और ये तरीके बेहद जरूरी भी हैं, लेकिन गंभीर मोटापे से जूझ रहे लोगों में कई बार इनसे लंबे समय तक स्थायी परिणाम नहीं मिल पाते। ऐसे मामलों में बैरिएट्रिक सर्जरी एक प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है।
बैरिएट्रिक सर्जरी में ऐसे ऑपरेशन शामिल होते हैं जो पाचन तंत्र के काम करने के तरीके में बदलाव करके वजन कम करने में मदद करते हैं। कुछ प्रक्रियाओं में पेट का आकार छोटा कर दिया जाता है, जिससे व्यक्ति कम मात्रा में भोजन करने पर ही जल्दी भराव महसूस करता है। वहीं कुछ प्रक्रियाएं शरीर द्वारा कैलोरी के अवशोषण को भी कम कर देती हैं। आज के समय में सबसे अधिक किए जाने वाले ऑपरेशनों में स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और गैस्ट्रिक बायपास प्रमुख हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. आशीष गौतम ने बताया “समय के साथ सर्जिकल तकनीकों में काफी सुधार हुआ है। पहले इन ऑपरेशनों के लिए ओपन सर्जरी करनी पड़ती थी, जिसमें बड़े चीरे लगाने पड़ते थे, जिससे दर्द ज्यादा होता था और रिकवरी में भी अधिक समय लगता था। बाद में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया, जिसमें छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरा और विशेष उपकरणों की मदद से ऑपरेशन किया जाने लगा। इससे मरीजों की रिकवरी तेज हुई और जटिलताओं का खतरा भी कम हुआ। अब इस क्षेत्र में सबसे नई और उन्नत तकनीक रोबोटिक बैरिएट्रिक सर्जरी है। इस तकनीक में सर्जन एक रोबोटिक सिस्टम की मदद से ऑपरेशन को अधिक कंट्रोल और प्रिसिशन के साथ करते हैं। सर्जन एक कंसोल पर बैठकर रोबोटिक उपकरणों को नियंत्रित करते हैं, जो मरीज के शरीर के भीतर छोटे चीरे के जरिए काम करते हैं। यह समझना जरूरी है कि रोबोट अपने आप सर्जरी नहीं करता, बल्कि पूरी प्रक्रिया पर सर्जन का ही पूरा नियंत्रण रहता है।“
रोबोटिक सर्जरी का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें सर्जन को ऑपरेशन वाले हिस्से की हाई-डेफिनिशन और थ्री-डायमेंशनल इमेज मिलती है, जिससे शरीर की संरचनाओं को बहुत स्पष्टता से देखा जा सकता है। इसके अलावा रोबोटिक उपकरणों की मूवमेंट मानव हाथ की तुलना में अधिक लचीली होती है, जिससे सर्जरी के नाजुक चरणों को अधिक आसानी और सटीकता से किया जा सकता है।
डॉ. आशीष ने आगे बताया “यह तकनीक ऑपरेशन के दौरान स्थिरता और सटीकता भी बढ़ाती है। सिस्टम छोटे-छोटे हाथों के कंपन को फिल्टर कर देता है और बहुत सूक्ष्म मूवमेंट की अनुमति देता है, जो विशेष रूप से सिलाई जैसे नाजुक चरणों में बेहद उपयोगी होता है। मरीजों के लिए भी रोबोटिक बैरिएट्रिक सर्जरी कई फायदे लेकर आती है। छोटे चीरे के कारण दर्द अपेक्षाकृत कम होता है, खून की कमी कम होती है और घाव में इंफेक्शन का खतरा भी घट जाता है। कई मरीज सर्जरी के कुछ घंटों के भीतर चलना-फिरना शुरू कर देते हैं और उन्हें जल्दी अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। रिकवरी भी सामान्यतः तेज होती है, जिससे मरीज जल्दी अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में लौट पाते हैं।“
गंभीर मोटापे वाले मरीजों में, जहां सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है, वहां रोबोटिक तकनीक और भी अधिक सहायक साबित होती है। बेहतर कंट्रोल और प्रिसिशन के कारण सर्जन इन प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित तरीके से कर पाते हैं।
सही मरीज चयन और अनुभवी सर्जिकल टीम के साथ रोबोटिक बैरिएट्रिक सर्जरी उन लोगों के लिए एक भरोसेमंद और प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है जो लंबे समय तक वजन कम करके बेहतर स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता हासिल करना चाहते हैं।

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